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प्यार का घनत्व कम न हो / राधेश्याम बन्धु

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कम भले हो तन का आयतन
प्यार का घनत्व कम न हो
लाख मुश्किलें हों राह में
शब्द का शिवत्व कम न हो

मिलनों की कठिन राह है
करती रतजगा चाह है
चुप्पी की चुभन रेत में
दोस्त है न कहीं राह है

हों न कभी फेरे बदनाम
प्रेम का गुरुत्व कम न हो

घर भी दूकान हो गए
रिश्ते सामान हो गए
दादा दादी को बाँटकर
बेटे मेहमान हो गए

चाहे दुनियाँ खिलाफ़ हो
मातु का ममत्व कम न हो

कर्ज-घुटन साँस साँस है
अम्मा का मन उदास है
महानगर हो गए महान
झुग्गी अब भी उदास है

चाहे हो शहर अजनबी
मीत का महत्व कम न हो