भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्यार का निराला युग हूँ / आनंद कुमार ‘गौरव’

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्यार का निराला युग हूँ
न यूँ अनमना कर देखो
मुझे गुनगुना कर देखो
 
मन दर्पण में बस तुम हो
सुधि सावन में बस तुम हो
श्वाँस-श्वाँस मेरे पूजन
और नमन में बस तुम हो
अधरों पर गीत की ऋचा
स्वर सुधा सजाकर देखो
 
काँटों की छाँव-सा हुआ
घाव भरे पाँव-सा हुआ
मेरा यह जीवन तुम बिन
पीड़ा के गाँव-सा हुआ
महका दो गीत का गगन
गले से लगाकर देखो