भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्यार मैं करूँगा पसंद मैं करूँगा / रविन्द्र जैन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्यार मैं करूँगा पसंद मैं करूँगा
मगर शादी होगी डैडी की इजाज़त से
प्यार हो किसी का और फ़ैसला किसी का
ना जी ना बाज़ आई मैं तो ऐसी मुहब्बत से

कहते हैं डैडी किसी पर भी मर-मिट
पर ले मुझी से सगाई का परमिट
राँझा ने किस से इजाज़त ली थी
मजनूँ ने किस की नसीहत ली थी
तभी तो बेचारे रह गए कुँवारे
मुझको है हमदर्दी इन लोगों की हालत से

हमने-तुमने नैन लड़ाए
डैडी कहाँ से बीच में आए
डैडी न होते तो मैं भी न होता
ब्याह न सगाई बनने लगे जमाई
करनी है शादी तो दिल रखो मुट्ठी में शराफ़त से