भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रधनमंत्री का आना-जाना / असंगघोष

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जुलियट ब्रावो
जुलियट ब्रावो
प्रताप वन कालिंग
हाँ यही है डूमना
घने जंगलों के बीच
अलसाई-सी लेटी हुई
एअरस्ट्रीप जुलियट ब्रावो।

थोड़ी ही देर में लैंड हो गया
एक जम्बो जेट सेवन टू सेवन
रनवे पर फैले हुए गोबर से सनाता हुआ
नीचे उतर बाल्टियों से धोने लगे जवान
सेवन टू सेवन
मैंने कहा आपको टेकऑफ भी करना है
फिर से सना जाएगा यह जम्बो,
प्रधानमंत्री के आने से पहले
इस तरह हो गई ट्रायल,
यहाँ पहली बार उतरा
सेवन टू सेवन
गोबर से सनाता हुआ।
तीन दिन बाद
साफ की जा चुकी हवाई पट्टी पर
तीन हेलीकॉप्टर आए एक साथ
बारी-बारी उतर गए
थोड़ी ही देर में
आना था सेवन टू सेवन
वह आया भी और
शान से उतर खड़ा हो गया एप्रॉन पर
एक ट्रक पर चढ़ा हुआ
अजीब सा प्लेटफार्म था
लाल किले की मानिंद
धीरे-धीरे ऊपर की ओर उठता हुआ
मानो प्रधानमंत्री को इसी से भाषण देना हो
सेवन टू सेवन के दरवाजे से लग स्थिर हो गया
दरवाजा खुला
सुरक्षा के बीच आ खड़े हुए
इस अजीब से प्लेटफार्म पर
अपने खराब हो चुके टखनों के साथ प्रधानमंत्री
धीरे-धीरे मंथर गति से
नीचे आने लगा वह अजीब-सा प्लेटफार्म
सतह पर आ हवाई पट्टी के
प्रधानमंत्रीजी ने अभिवादन लिया-दिया
और वे सवार हो गए
एक हेलीकॉप्टर में
अन्य दोनों हेलीकॉप्टरों के स्टार्ट होते ही
उनके पंखों से उत्पन्न हवा के दबाव से
रात में गिरा पानी भी चारों ओर उड़ने लगा
भीगते हुए हम भी जा बैठे अपनी गाड़ियों में
और हेलीकॉप्टर अपने गंतव्य की ओर चल दिए
उनके जाते ही आला अफसर भी भाग लिए
किन्तु जंबो को जिसने देखा हो पहली बार
अपने साथी निश्चल को वहीं रोक खुद रुक गया,
यही कोई पच्चीस मिनट बाद
खराब मौसम के कारण गंतव्य पर उतरे बिना
लौट आए तीनों हेलीकॉप्टर
मैं और निश्चल,
निश्चल और मैं,
दोनों देखते रहे एक-दूसरे को
आला अधिकारी उस समय नहीं थे वहाँ मौजूद
हमारा चेहरा पढ़ने,
हम दोनों थे मुस्तैद किन्तु
किसी हेलीकॉप्टर से कोई उतरा ही नहीं
थोड़ी देर बाद फिर उड़ चले
तीनों हेलीकॉप्टर
इस बार गंतव्य पर उतर सभा करके ही लौटे,
लौट कर चढ़े प्रधानमंत्री
सेवन टू सेवन में वैसे ही जैसे उतरे थे,
इस तरह चले गए वापस प्रधानमंत्री, नई दिल्ली
संस्कारधानी से राजधानी।

उनके इस आने और जाने
को लेकर ही की गई थीं भव्य तैयारियाँ अनेक
अशोका जिसमें अब जुड़ गया था सत्य भी
से आया था ढेर सारा खाने का सामान
काजू, किशमिश, बादाम
सादा भी, भुना भी
छुआरे थे, शकरपारे थे
नमकीन था, मीठा था,
पता नहीं और थैलियों में क्या-क्या भरा था
उनकी मात्रा का नहीं पता कितने किलो था,
जिसे सर्व करने का वेटर भी था,
कुछ लदा, कुछ फदा, बाकी कहाँ गया... वापस हुआ
नहीं पता,
हेलीकॉप्टर और सेवन टू सेवन में जितना जाना था गया
किसने खाया होगा इतना सब नहीं पता,
अकेले प्रधानमंत्री तो निश्चित ही नहीं ही खा सकते थे,
बाकियों का नहीं पता
किसने कितना खाया,
कितना बाँधा नहीं पता,
हम देखते रहे,
थे ही वहाँ सिर्फ देखने के लिए
इस तरह प्रधानमंत्री का आना और जाना
थोड़े से विघ्न के साथ सम्पन्न हुआ,
और
जुलियट ब्रावो
फिर से आबाद हो गई
गाएँ रंभाने लगीं
तबसे सेवन टू सेवन फिर नहीं आया।