भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रार्थना / श्रीनाथ सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कहाँ तुम रहते हो, भगवान!
कभी न तुमको देखा मैंने,
सका न तुमको जान।
रहते हो तुम पास हमारे,
फिर कैसे लूँ मान।
तजो, अकेले रहने की,
क्यों डाली ऐसी बान।
नाथ! ऊबते होगे,
कर लो हमसे ही पहचान।