भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रीत : दो / विरेन्द्र कुमार ढुंढाडा़

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

प्रीत रा फळ
भोत मीठा
आव चाखां।
उंतावळ नीं
पैली लागण दे
पांगरण दे
फेर पाकण दे

पाक्यां
पकायत ई
होसी मीठा
अभी ना धार
ठाह तो
चाख्यां ई लागसी।
देखी
काच्ची
ना तोड़ लेई
मन रै मतै
प्रीत !