भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रेम पर कुछ बेतरतीब कविताएँ-4 / अनिल करमेले

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

एक फूल में कितने रंग
कितने रंगों में कितनी ख़ुशबुएँ
बनतीं और बिखरतीं
साझे सपनों से

बहुत कोमल हाथों से
रोपना था इन्हें
विश्वास और यथार्थ की ज़मीन पर

हमारे हाथों की
नरमाहट चली गई थी
वे भी बिखर गए मेरी तरह
तुम्हारी तरह।