भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

प्रेम / गुंजनश्री

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

स्नानागारक देबाल पर
टिकुली सन साटल
पानि सँ फूलल-फुलायल
लगैत छी अहाँ हमरा
जल-बिंदु सन छट-छट करैत
प्रेम मे फूलल-घुलल...

अहाँक प्रेम थिक
अध्यात्मक एक अजबारल अध्याय
मुदा हम चाहैत छी केवल काम
आगि नहि
आसक्ति मे जीबि रहल छी हम
ठीक ओहिना जेना
उर्वशीक खोईंछ मे रहनि
पुरुर्वाक जीवन