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प्रेम / धनंजय वर्मा
Kavita Kosh से
रेखा से
पानी का लोटा लुढ़क गया
बहता-बहता पानी
धरती के कंकर भिगो गया,
फिर सूख गया ।
अम्मा ने
रेखा को समझाया --
’पानी आबरू है बिटिया’...