Last modified on 20 मार्च 2015, at 17:21

फाटी सी दीन्ही गोदड़ी रे बनदेवा / पँवारी

पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

फाटी सी दीन्ही गोदड़ी रे बनदेवा
टूटी सी दीन्ही खाटऽ रे बनदेवा
गाँवा चराऊ मखऽ नींद नी आवत।।