भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

फीका चाँद/जावेद अख़्तर

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज



सुखी टहनी, तन्हा चिड़िया, फीका चाँद
आँखों के सहरा[1] में एक नमी का चाँद

उस माथे को चूमे कितने दिन बीते
जिस माथे की खातिर था एक टिका चाँद

पहले तू लगती थी कितनी बेगाना
कितना मुब्हम[2] होता है पहली का चाँद

कम कैसे हो इन खुशियों से तेरा गम
लहरों में कब बहता है नदी का चाँद


आओ अब हम इसके भी टुकड़े कर ले
ढाका रावलपिंडी और दिल्ली का चाँद

शब्दार्थ
  1. विराना
  2. धुंधला