भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

फुल गजरा ओ दाई बर / छत्तीसगढ़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

फुल गजरा ओ दाई बर , फुल गजरा ।
गुथौँ महामाई के बर , फुल गजरा ॥

काहेन फूल के गजरा , अव काहेन फूल के हार ।
काहेन फूल के माथे मकुटिया , सोला हो सिंगार ॥
माइ बर फूल गजरा ओ दाई बर फुल गजरा ।
गुथौँ हो मालिन के अंगना , फुल गजरा ॥

चंपा फूल के गजरा , चमेली फूल के हार ।
मोंगरा फूल के माथे मकुटिया , सोला हो सिंगार ॥
माइ बर फूल गजरा ओ दाई बर फुल गजरा ।
गुथौँ हो मालिन के अंगना , फुल गजरा ॥

कौन माइ बर गजरा , अव कोन माइ बर हार ।
कोन माइ बर माथ मकुटिया, सोला हो सिंगार ॥
माइ बर फूल गजरा ओ दाई बर फुल गजरा ।
गुथौँ हो मालिन के अंगना , फुल गजरा ॥


बुड़ी माइ बर गजरा , अव मंझली माइ बर हार ।
सीतला माइ बर माथ मकुटिया, सोला हो सिंगार ॥
माइ बर फूल गजरा ओ दाई बर फुल गजरा ।
गुथौँ हो मालिन के अंगना , फुल गजरा ॥