भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बचा लेना / दीपिका केशरी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मन उतनी पीड़ा बचा लेता है अपने पास
जितने से उस दर्द को बार-बार महसूसा जा सके,
पत्ते उतना रंग बचा लेते हैं अपने पास
जितने से पत्ते के एक ही रंग को
बार-बार महसूसा जा सके
फिर
प्रेम में दो लोग उतना प्रेम क्यूँ नहीं बचा पाते
जितने में दो लोग
एक उम्र भर अपने प्रेम को प्रेम ही कह सकें !