भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बड़े दिनों बाद / रमेश तैलंग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बड़े दिनों बाद खिला
गमले में फूल ।

रंग भरे मन में
उम्मीद नई जागी
बैठी थी अब तक
उदासी जो, भागी
चलो, किसी तरह झड़ी
जमी हुई धूल ।

चिड़िया ने कंठ खोल
ख़ूब चहचहाया
सन्नाटा देखता रहा
सकपकाया
चौकन्नी धूप
गई पर्दे पर झूल ।
बड़े दिनों बाद खिला
गमले में फूल ।