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बता मऽरा बीरनऽ को द्वार रे बनदेवा / पँवारी

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पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बता मऽरा बीरनऽ को द्वार रे बनदेवा
गौवा चराऊ मखऽ नींद नी आवय।।
आम-शाम की झोपड़ी
सूर्या मुख द्वार रे बन देवा
गौवा चराऊ मखऽ नींद नी आवय।।