Last modified on 12 नवम्बर 2010, at 12:19

बरस रही है हरीमे हविस में दौलते हुस्न / फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

बरस रही है हरीमे हविस में<ref> भोगविलासी महलों में</ref> दौलते हुस्न<ref>रूप-राशि</ref>
गदाए इश्क के कासे में<ref>प्रेम के भिक्षापात्र में</ref> इक नज़र भी नहीं
न जाने किस लिए उम्मीदवार बैठा हूँ
इक ऐसी राह पे जो तेरी रहगुज़र<ref>रास्ता, मार्ग</ref> भी नहीं

शब्दार्थ
<references/>