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बरा तरी झूलनि मैं गयउं / बघेली

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बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बरा तरी झूलनि मैं गयउं कि मोरिउ गई जेठानी
दुइ दुन्नों रंगित लाल दुइ दुन्नों मैन मजीठ
दुइ दुन्नों अम्मा घउद लगे
झूलि झालि जब घर का बहुरेन
दुअरा मां सुरही गाय
गाय गोसाईं तोरे पइयां लागौं
एक नन्चू सींग सकेल
दुइ दुन्नों रंगित लाल दुइ दुन्नों मैन मजीठ
दुइ दुन्नों अम्मा घउद लगे
झूलि झालि जब घर लउटिउं
दुअरा मा ससुरू के सेजि
ससुर गोसाईं तोरी पइंयां लागउं
एक नन्चू सेज सकेलि लेउ
दुइ दुन्नों रंगिल लाल दुइ दुन्नों मैन मजीठ
दुइ दुन्नों अम्मा घउद लदे
झूलि झूलि जब घर का बहुरेन
दुअरा मा सेठजी के सेज
जेठ गोसाईं तोरी पइंया लागौं
एक नन्चू सेज सकेलि लेइ
दुइ दुन्नों रंगित लाला दुइ दुन्नों मैन मजीठ
दुइ दुन्नों अम्मा घउद लगे
झूलि झूलि जब घर का लौटेन
दुअरा मा पति जी कै सेज
पति देव मोरे मैं तोरे पइयां लागौं
एक नन्चू सेजिया सकेल लेव
दुइ दूनौ रंगित लाला दुइ दुनौ मैन मजीठ
दुइ दूनौ अम्मा झूमरिया
बरा तरी झूलनि मैं गयउं कि मोरी गई जेठानी
दुइ दुनौ रंगित लाला दुइ दूनौ मेन मजीठ
दुइ दूनौ अम्मा झूमरिया