भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
बर तरफ़ करके तकल्लुफ़ इक तरफ़ हो जाइए / जावेद सबा
Kavita Kosh से
बर तरफ़ कर के तकल्लुफ़ इक तरफ़ हो जाइए
मुस्तक़िल मिल जाइये या मुस्तक़िल खो जाइए
क्या गिले शिकवे के किस ने किस की दिल-दारी न की
फै़सला कर ही लिया है आप ने तो जाइए
मेरी पलकें भी बहुत बोझल हैं गहरी नींद से
रात काफी हो चुकी है आप भी सो जाइए
आप से अब क्या छुपाना आप कोई ग़ैर हैं
हो चुका हूँ मैं किसी का आप भी हो जाइए
मौत की आग़ोश में गिरिया-कुनाँ है जिं़दगी
आइए दो चार आँसू आप भी रो जाइए
शाएरी कार-ए-जुनूँ है आप के बस की नहीं
वक़्त पर बिस्तर से उठिए वक़्त पर सो जाइए