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बहुत ख़राब किया ख़्वाहिशाते दुनिया ने / शहजाद अहमद

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बहुत ख़राब किया ख़्वाहिशाते दुनिया ने
ज़रा ज़रा से ये बुत बन गए ख़ुदा मेरे

ये दुश्मनों से नहीं जात से लड़ाई है
किसी भी काम न आयेंगे दस्तो पा मेरे

तू दोस्तों की तरह फ़ासला न रख इतना
हरीफ़ है तो फिर आ पास बैठ जा मेरे

ये और बात कि मैं बज़्म में अकेला हूँ
बहुत करीब ही बैठे हैं आशना मेरे

वो रौशनी थी कि मैं कुछ न देख पाया था
कल आफ़ताब बहुत ही करीब था मेरे