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बहै पुरवैया कोसी माय डोलले सेमैर / अंगिका

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बहै पुरवैया कोसी माय डोलले सेमैर,
नदिया किनारे महामैया भइये गेलखिन ठाढ़ि ।
नैया लाउ नैया लाउ मलहा जे भाय,
पाँचो बहिन दोलिया मलहा उतारि दियौ पार ।
कथी के नैया कोसी माय कथी के पतवार,
कोने विधि नैया उतारि दियौ पार ।
सोना के नैया कोसी माय रूपा के पतवार,
झमकैत दोलिया उतारि दियौ पार ।
खनै नैया खेवै कोसी माय खने भसियाय,
खने मलहा पूछै जाति के ठेकान ।
जाति के रे छियै मलहा बाहानक बेटी,
नाम हमर छियै कासिकामाय ।
आब की पूछै छह मलहा दिल के बात,
बँहिया जे छूबै मलहा कोढ़ी फूटि जाय ।