भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बानी माँग रहे / अनूप अशेष

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

अपने सूखे हुए खेत
फिर पानी माँग रहे,
बूढ़ों के वारिस
बच्चे ज्यों
छानी माँग रहे।

बादल जी के घर में
कैसे इतनी देर हुई,
फटी चादरों के कोने
ज्यों खोई हुई
सुई।
आसों के
यह बरस इंद्र।
गुड़धानी माँग रहे

हम तो अपने दिन से
लंबी प्यासें साँट रहे,
घर का बिया
अधसना आटा
आशें बाँट रहें।
मेड़ों-से जम गए
ओंठ की
बानी माँग रहे।।