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बाबू क्लीनर / गणेश पाण्डेय

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बाबू क्लीनर
इतने गंदे क्यों रहते हो
क्यों खाते हो हरदम पान
बात-बात पर हँसते क्यों हो
हो-हो ।

हर गाने पर मूड़ी खूब हिलाते क्यों हो
लगता है तुम सचमुच
इस गाड़ी के मालिक हो ।

कुछ तो बोलो
बाबू क्लीनर
ख़ुश दिखने का भेद तो खोलो
हँसकर दर्द छुपाते क्यों हो ।