भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बारिश-7 / पंकज राग

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

गीलेपन की इंतहा बारिश नहीं होती
इंतहा उत्कर्ष के क्षण में ही हो, यह ज़रूरी भी नहीं
किसी का पूरी तरह से बहकर निकल जाना भी एक चरम-स्थिति है
और उस ख़ास पल में
अन्दर से तरल वह आदमी
बाहर से कितना निराश, बंजर और कितना सूखा दिखता है
सच, गीलेपन की इंतहा बारिश तो हो ही नहीं सकती