बाला सुंदर, हाला घट-भर,
उमर हमारे प्रिय सहचर नित!
उर का सुख दीपक बन हँसमुख
सुहृद् सभा करता आलोकित!
प्रेम अशन, आनन्द वसन,
तन पुलक-अंकुरित, हृदय-उल्लसित,
जो कुछ प्रियतर, सुखद मनोहर
सखे, हमारे लिए विनिर्मित!
बाला सुंदर, हाला घट-भर,
उमर हमारे प्रिय सहचर नित!
उर का सुख दीपक बन हँसमुख
सुहृद् सभा करता आलोकित!
प्रेम अशन, आनन्द वसन,
तन पुलक-अंकुरित, हृदय-उल्लसित,
जो कुछ प्रियतर, सुखद मनोहर
सखे, हमारे लिए विनिर्मित!