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बिछिया तो म्हें झटझट पेरिया / मालवी

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   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बिछिया तो म्हें झटझट पेरिया
सोकनिया रा डर से
अनबट री जगाजोत हो
कूंकड़ो झट बोल्यो मारूजी
भैंस मंगाऊँ, मिनकी पालां
कूंकड़ा रो साल मिटावां
सोकड़ नो भरमायो, बैरन रो भरमायो
कूंकड़ो झट बोल्यो मारूजी