भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बिना चेहरे वाले / वत्सला पाण्डे

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

कितने दिन हो गए
जागते हुए
नींद भर गई
आंखों में

दिखने लगे हैं
बिना चेहरे वाले
आदमी

वे बोलना चाहते हैं
खाना चाहते हैं
सूंघना चाहते हैं
देखना चाहते हैं
पर
सुन भी नहीं पाते

प्रतिक्र्र्रिया में
शब्द गिर पडे. हैं
किसी कुंए में

मुंडेर पर खड़ा
आसमान
झांक रहा

देख रहा
विस्मय से
क्या
बिना चेहरे वाले
आदमी