भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

बीरा थे दाम्मण भल ल्याईओ / हरियाणवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बीरा थे दाम्मण भल ल्याईओ
चुन्दड़ी पर रतन जड़ाईओ
म्हारा रिमक झिमक भाती आईओ
बेस्सर थे भल ल्याइओ
झूमर पर रतन जड़ाईयो
म्हारा रिमक झिमक भाती आईओ
बोरलै पै रतन जड़ाईयो
म्हारा रिमक झिमक भाती आईयो