भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बुला तोरी बहिन खऽ ते धोहे तोरा पाय रे / पँवारी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

पँवारी लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

बुला तोरी बहिन खऽ ते धोहे तोरा पाय रे
हीरा बेटा ली जा दारी, नाम हजारी रखा ले
तू हा- हा हारी
सोने की चिड़िया बोले चूं।।
दूर-दूर सी आयी ओ समधन,
बड़ निच्च्अ् उतर जा तू हॉ- हॉ हारी
सोन्ने की चिड़िया बोले चू।।