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बूढ़ी लुगाई / श्याम महर्षि

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म्हनैं याद है बो दिन
जिणनै ओजूं ई
बियां ई देखूं
जाणै आज ई
बीती है बा घटना
म्हारी आंख्या आगै।

दिल्ली सूं बीकानेर
जावण वाळी बस,
राजगढ़ बस अड्डे सूं
चालतां ई
बा बूढ़ी लुगाई दबगी
रामजी री गांय दांई।

ऐकर चांरूमेर
हाको सो हुयो
अर थोड़ी देर पछै चुप हुय‘र
सगळा लोग व्हीर हुयग्या
नौटंकी रा खिलाड़ी दांई।

मैली धोती पैरयां
हाथ मांय चिटियो लियोड़ी
बा धोळा केसां वाळी
बूढ़ी लुगाई
तारानगर-सरदारशहर-बीकानेर कानीं
बगणै वाळी बस नैं
आपरो खोळियो सूंप‘र
पड़ी रैयी बारह घण्टा तांई।

भारत मां नै
म्हैं कदैई
नीं देख पण
म्हारी दादी जिसी ई ही
बा बूढ़ी लुगाई।