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बेख़बर हू, खु़दा जे क़ाबिल आ / एम. कमल

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बेख़बर हू, खु़दा जे क़ाबिल आ।
दर्द दिल जो, दुआ जे क़ाबिल आ॥

हर को पंहिंजो नज़र अचे थो मूं खे।
सादगी हीअ, सज़ा जे काबिल आ।

बेवफ़ाईअ जी आह दाँह करे!
ही ॼुटी दिल, जफ़ा जे क़ाबिल आ॥

फटु पुराणो न हल्की दीद लहे।
चोट ताजी, दवा जे क़ाबिल आ॥

खु़द खे साराहे थे, नथो ॼाणे।
खु़द-सनाई, गिला जे क़ाबिल आ॥

पूरो वेसहु अथसि असां में अॼु।
दोस्तु हाणे, दग़ा जे क़ाबिल आ॥

न खिली हू सघे, न रोई सघे।
हुन जी हालत दया जे क़ाबिल आ॥