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बेटियाँ / कुंदन सिद्धार्थ

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आयी थी ख़ुश
जा रही उदास

घर से चले जाने के बाद
बेटियाँ तीन चौथाई यहीं घर में रह जाती हैं
माँ-पिता के आशीष की पोटली में
एक चौथाई अपने को सम्भाले
घर से जाकर भी बेटियाँ कहीं नहीं जातीं

हॉस्टल के लिए बेटी को विदा करते हुए
यही सोच रहा था

बेटियाँ नहीं होतीं
तो दुनिया में बहुत कुछ होता
पर घर न होता
दुनिया में पहला घर
बेटियों ने बनाया

बेटियाँ नहीं होतीं
तो दुनिया में सब कुछ होता
पर प्रेम न होता

एक प्रेम के न होने से
सब कुछ व्यर्थ हो जाता

बेटियों से सार्थक है जीवन
पत्नी को समझाता हूँ
फोन करके बेटी से पूछूँ
पहुँची कि नहीं
वह टोकती है

पत्नी भी बेटी है, सोचकर
मंद-मंद मुस्कराता हूँ