भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बेन्या बाई आरती जी / मालवी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

राइवर उबा राइवर उबा हे मांडप आय तम करो वो
बेन्या बाई आरती जी।

बईरी सासु बईरी सासु नणद पूछे बात
ववड़ कोई ओ लादो आरती जी।

घोड़ला लादा घोड़ला लादा मांडपड़ा रे हेट
म्हारे मोरा ओ लादी डेड़सो जी घोड़ाला लादा
घोड़ला मांडपड़ा रे हेट म्हारे मोरा हो लादी डेड़ सो जी।

वकड झूटा ववड़ झूटा ओ झूटा रा बोल्या
थारी एक टकारी आरती जी।

राइवर उबा राइवर उबा मांडपड़ा रे हेट
तम करो वो बेन्या बाई करो वो सुमन बाई करो
वो मनीसा बाई करो वो टुइया बाई आरती जी।