भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

बैठे लाल फूलन के चौवारे / कुम्भनदास

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बैठे लाल फूलन के चौवारे ।
कुंतल, बकुल, मालती, चंपा, केतकी, नवल निवारे ॥
जाई, जुही, केबरौ, कूजौ, रायबेलि महँकारे ।
मंद समीर, कीर अति कूजत, मधुपन करत झकारे ॥
राधारमन रंग भरे क्रीड़त, नाँचत मोर अखारे ।
कुंभनदास गिरिधर की छवि पर, कोटिक मन्मथ वारे ॥