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बैल बियावै, गैया बाँझ / 70 / चन्द्रप्रकाश जगप्रिय

सियारनीं
न्यायाधीश शेर सेॅ कहलकै-
ओकरोॅ सांय
दूसरो बीहा करलकै
आरो तेसरी केॅ राखलेॅ छै
चौथी केॅ
डेट पर लै जाय रहलोॅ छै
पाँचवी सेॅ
आँख लड़ावै छै।
न्यायाधीश शेरें दहाड़तेॅ होलेॅ
सियारोॅ सेॅ पुछलकै-
की ई सच छेकै?
सियार दू टाँगोॅ पर ठांड़ोॅ भै गेलै।
शेर समझी गेलै
ई आदमी होय गेलै।

अनुवाद:

सियारनी ने
न्यायाधीश शेर से कहा-
उसके पति ने
दूसरी शादी की
और तीसरी को रखे हुए है
चौथी को
डेट पर ले जा रहा है
पाँचवी से
आँखें लड़ा रहा है
न्यायाधीश (शेर) ने दहाड़ते हुए
सियार से पूछा-
क्या यह सच है?
सियार दो टाँगों पर खड़ा हो गया
शेर समझ गया
यह आदमी हो गया।