भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए

बोलती चुप्पी / संजीब कुमार बैश्य / प्रभात रंजन

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

चुप्पी
एक मज़बूत शब्द है
इसमें गूँजती हैं अनसुनी आवाज़ें
किसी चुप्पा विद्रोही की

वह अपने समय का
इन्तज़ार करता है;
और चुप्पी
बोलती है।

अँग्रेज़ी से अनुवाद : प्रभात रंजन