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बोली ओखर तो, करूहा होगे ओ / रमेशकुमार सिंह चौहान

बोली ओखर तो, करूहा होगे ओ
बाबू के ददा हा, दरूहा होगे ना।

मोरे ओ मयारू, रहिस अड़बड़ ...
पी अई के तो मारे, बइसुरहा होगे ना।

रूसे कस डारा, डोलत रहिथे...
बाका ओ जवान, धक धकहा होगे ना।

फोकट के गारी, अऊ फोकट के मार...
जीयवं कइसे गोई, धनी झगरहा होगे ना।

पिलवा पिलवा लइका, मरवं कइसे...
जीनगी हा मोरे, अब अधमरहा होगे ना।