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बोल कबूतर / सुरेश विमल

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गुटर गुटर गूं बोल कबूतर
कानों में रस घोल कबूतर

गर्दन फुला ज़रा मस्ती में
छज्जे ऊपर डोल कबूतर

चुग ले चुग ले चुग्गा झटपट
चोंच ज़रा-सी खोल कबूतर

मटक मटक कर नाच दिखा दे
बजा रहा मैं ढोल कबूतर।