भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

ब्य्नीका अंगना म पिपली रे / निमाड़ी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

ब्य्नीका अंगना म पिपली रे वीरा चुन्ड लाव्जे।
लाव्जे तो सबई सारू लाव्जे रे वीरा
नही तो र्ह्य्जे आपणा देस माडी जाया चुन्ड लाव्ज
संपत थोडी वो ब्य्नी विपत घ्नेडी,
कसी पत आउ थारा देस माडी जाई चुन्ड लाऊ
भाव्जियारो कंगन ग्य्नो मेल्जे रे वीरा चुन्ड लाव्जे।
लाव्जे तो सबई सारू लाव्जे रे वीरा चुन्ड लाव्जे
एतरो गरब क्यो बोलती वो ब्य्नी चुन्ड लांवा
हमछे पांचाई भाई की जोत माडी जाई चुन्ड लावा


भावार्थ
यह गीत निमाड़ में शादी के समय मंडप में जब भाई मामेरा (निमाड़ी में इसे पेरावनी कहते है) लेकर आता तब गाया जाता है इसका भावार्थ है, बहनअपने भाई से कहती है, मेरे भाई तुम जब भी पेरावनी (कपडे आदि) लाओ तो मेरे पुरे परिवार के (साँस ससुर देवर जेठ आदि) लिए लाना और नही तो अपने देश में ही रहना। भाई कहता है मेरे पास धन बहुत कम है विपति बहुत है परन्तु फ़िर भी मै जेसा तुम कहोगी वैसा ही मै लाऊंगा।