भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  रंगोली
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार
Roman

भइया किरिया बेसरिया हम लेबो / मगही

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

मगही लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

भइया किरिया[1] बेसरिया हम लेबो।
भइया किरिया बेसरिया हम ना देबो॥1॥
जब तुम ननदो, बधावा लेने अइहो।
भइया किरिया, हम भी किवाड़ हनी देबो[2]॥2॥
जल तुम भाभी, किवाड़ हनी देबो[3]
भइया किरिया, हम भी दीवार फाँदी ऐबो[4]॥3॥
जब तुम ननदो, दीवार फाँदी अइहो।
भइया किरिया, हमहु नइहर चलि जैबो॥4॥
जब तुम भाभी, नैहर चलि जइहो।
भइया किरिया, हम भी हलकारा[5] भेज देबो॥5॥

शब्दार्थ
  1. शपथ
  2. किवाड़ बन्द कर किल्ली ठोक देना।
  3. दोगी
  4. आऊँगी
  5. संदेशवाहक