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भजन बिन जीवन बीत गया / शिवदीन राम जोशी

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भजन बिन जीवन बीत गया |
रूप स्वरूप शारीरिक बल सब, जोबन बीत गया ||
बालपना तो गया खेल में, तरुनाई तिरिया के मेल में |
सबसे बुरा बुढ़ापा छछिया, वह नवनीत गया ||
ऐ ! मनमौजी समय बिताया, तेरे हाथ कछु ना आया |
गाया करता मधुर स्वरों से, वह संगीत गया ||
जगत जेल से छूट सका ना, राम नाम धन लूट सका ना |
संत संगाती सच्चा साथी, प्यारा मीत गया ||
भरत खंड में चार पदारथ, क्यूँ ना अगला जनम सुधारत |
शिवदीन हरि से प्रीत लगा,फिर बाजी जीत गया ||