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भभूति मल के आऊंगा गली में / राजेंद्र नाथ 'रहबर'

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भभूति मल के आऊंगा गली में
अलख आ कर जगाऊंगा गली में
तुम अपने दर पे भिक्षा ले के आना
मैं जोगी बन के आऊंगा गली में।