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भागल सुगना गहबरमे जाइ छै / मैथिली लोकगीत

मैथिली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

भागल सुगना गहबरमे जाइ छै
हा सुतल बरिया गहबरमे लगै छै
एक्के सिरमे दीनाभद्री सुतल छै
हा सुगना आइ बोलीया गहबरमे पड़लैय यौ।
सीताराम सीताराम सुगना बोलै छै
बोली मधुरिया नींनमे सुनलकै
पले आइ नींन भदरी के टूटि गेल
आ पल उठाके बौआ भदरी तकै छै
हा सुगना सरूप आइ भदरी देखलकै
हा दीनाराम के भद्री जगबै छै
सुनऽ सुनऽ हौ सहोदरा सुनिलय
हौ एत्तेक सुग्गा हमहु देखलीयै
एहेन नइ सुगना सहोदरा हम देखलीयै यौ।
एलै समधिया यार सलहेस के
कुशल समाखा उठि के बुझि लीयौ यौ।
उठि के यै दीनाराम भद्री बैठलय
हा सब कुशलिया पूछै छै सुगना से
तब जवाब सुगना कहै छै
सुनऽ हौ सुनऽ राजा दरबी
तोरा कहै छी दिल के वार्त्ता
हौ तोरे हौ बजाहटि भेल महिसौथा
जल्दी से चलियौ महिसौथा के नगरमे।