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भातीं सब बातें तभी / त्रिलोक सिंह ठकुरेला

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भातीं सब बातें तभी, जब हो स्वस्थ शरीर।
लगे बसंत सुहावना, सुख से भरे समीर॥
सुख से भरे समीर, मेघ मन को हर लेते।
कोयल, चातक मोर, सभी अगणित सुख देते।
'ठकुरेला' कविराय, बहारें दौड़ी आतीं।
तन, मन रहे अस्वस्थ, कौन सी बातें भातीं॥