भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

भारतवर्ष / महावीर प्रसाद द्विवेदी

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

जै जै प्यारे देश हमारे, तीन लोक में सबसे न्यारे ।
हिमगिरी-मुकुट मनोहर धारे, जै जै सुभग सुवेश ।। जै जै भारत देश ।।१।।

हम बुलबुल तू गुल है प्यारा, तू सुम्बुल, तू देश हमारा ।
हमने तन-मन तुझ पर वारा, तेजः पुंज-विशेष ।। जै जै भारत देश ।।२।।

तुझ पर हम निसार हो जावें, तेरी रज हम शीश चढ़ावें ।
जगत पिता से यही मनावें, होवे तू देशेश ।। जै जै भारत देश ।।३।।

जै जै हे देशों के स्वामी, नामवरों में भी हे नामी ।
हे प्रणम्य तुझको प्रणमामी, जीते रहो हमेश ।। जै जै भारत देश ।।४।।

आँख अगर कोई दिखलावे, उसका दर्प दलन हो जावे ।
फल अपने कर्मों का पावे, बने नाम निःशेष ।। जै जै भारत देश ।।५।।

बल दो हमें ऐक्य सिखलाओ, सँभलो देश होश में आवो ।
मातृभूमि-सौभाग्य बढ़ाओ, मेटो सकल कलेश ।। जै जै भारत देश ।।६।।

हिन्दू मुसलमान ईसाई, यश गावें सब भाई-भाई ।
सब के सब तेरे शैदाई, फूलो-फलो स्वदेश ।। जै जै भारत देश ।।७।।

इष्टदेव आधार हमारे, तुम्हीं गले के हार हमारे ।
भुक्ति-मुक्ति के द्वार हमारे, जै जै जै जै देश ।। जै जै भारत देश ।।८।।

रचनाकाल : अक्तूबर 1920
’द्विवेदी काव्यमाला’ से