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भीष्म / चैनसिंह शेखावत

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म्हैं परतीतूं आज
जाणै भीष्म बण्यो बैठ्यो हूं।

डचका भरतो बगत
ईयां लागै कै कीं पूछसी
अबखायां नै अंवेरतां
किण नै कांई सूझसी

खुद रा ताना बाना
उळझ्योड़ो
ठेटूं ठेट तण्यो बैठ्यो हूं।

बाको फाड्यां महाभारत
सगळी सोध
सवालां सारू
उथळा आवै किण कानी सूं
निजरा अटकी झालां सारू

मून मनायो मैं’गो पड़ग्यो
आरूं पार छण्यो बैठ्यो हूं।