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भोर ने जब आँख खोली / ममता किरण

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भोर ने जब आँख खोली
लालिमा थी संग
एक किरण फूटी रुपहली
कर गयी श्रृंगार !

भोर के माथे है सूरज
रूप किरणों से सजा है
भोर की उस गोद में
माँ के आँचल सा मजा है

भोर का स्पर्श मन में
कर गया झंकार !

बांग मुर्गा दे रहा है
घंटियों की हें सदाएं
भोर के आँचल ने दी है
प्यार से अपनी दुआएं

भोर दस्तक दे रही है
हर किसी के द्वार !

भोर का आँगन खिला है
पक्षियों का है चहकना
बूटा बूटा खिल उठा है
संग फूलों का महकना

भोर का दामन पकड़
दिन को करें हम पार !