भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मंगवा छाता / श्रीनाथ सिंह

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

डाली डाली-की हरियाली
का न रहा वह साज
विकल बड़ी है,
गिरी पड़ी है,
सूखी पत्ती आज।
मोटे कपड़े तन को जकड़े,
करतें हैं हैरान।
जरा न भाते, अति गरमाते,
खाये लेते जान।
राह बड़ी है धूप कड़ी है,
उड़ती है अति धूल।
जल्दी माता, मंगवा छाता,
जाना मुझको स्कूल।