मंज़र भला था फिर भी नज़र को बुरा लगा
दीवारो-दर को सारे ही घर को बुरा लगा
खुशहाल होना मेरा, अज़ीज़ों से पूछिये
पत्ता हरा हुआ तो शजर को बुरा लगा
मंज़र भला था फिर भी नज़र को बुरा लगा
दीवारो-दर को सारे ही घर को बुरा लगा
खुशहाल होना मेरा, अज़ीज़ों से पूछिये
पत्ता हरा हुआ तो शजर को बुरा लगा