भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मचिया बैसल हे कोसिका / अंगिका

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मचिया बैसल हे कोसिका,
भितिया अंगुठल
दीनानाथ के वटिया हेरै छै ।
कहँमा से भागवै हे कोसी
चानन के लकड़िया
कहाँ से मंगेवै सूतिहार ।
मोरंग से मंगेवै हे कोसिका
चानन लकड़िया
तिरहुत से मंगेवै सूतिहार ।
कथी से छेवैवे हे कोसिका
चानन के लकड़िया
कथी से छेवैवे हे कोसिका
पैर के खड़म ।
आरी से छेवैवे हे कोसिका
चानन के लकड़िया
बसुला से छेवैवे हे कोसिका
पैर के खड़म ।
कहाँ गेल किअ भेल
दीनानाथ दुलरूआ
पीन्हि लिअ पैर के खड़म ।।