भारत की संस्कृति के लिए... भाषा की उन्नति के लिए... साहित्य के प्रसार के लिए
  काव्य मोती
लोक संगीत
कविता कोश विशेष क्यों है?
कविता कोश परिवार

मथुरा मा लागी एक बजरिया / बघेली

Kavita Kosh से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज

बघेली लोकगीत   ♦   रचनाकार: अज्ञात

मथुरा मा लागी एक बजरिया
कि मेंहदी आई बिकाय
जइहा देउरवा मेंहदी लैअइहा
रूपियै सेर विकाय
मेंहदी रचि गई कोइली परि गई
देखन वाले विदेश
काह फारि मैं कागद बनाऊं
काहिन कै मसि लेउं
ए जी काही बनाऊं मैं असल कइथवा
हरि जू का पाती लै के जाय
ए जी अचर फारि मैं कागद बनाऊं
नैनेन से मसि लेउजी
ए जी देउरा बनाऊं असल कयथवा
कि हरि जू का पाती लै के जाय